पश्चिम बंगाल ने गुटखा, पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

पश्चिम बंगाल ने गुटखा, पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में गुटखा, पान मसाला के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है जो कि 7 नवंबर से प्रभावी होगा. यह प्रतिबंध अगले एक वर्ष के लिए लगाया गया है. पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने राज्य में गुटखा और पान मसाला के उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए एक सूचना जारी की है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने तंबाकू उत्पादों का उपयोग करने पर होने वाले दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने हेतु यह कदम उठाया है. यह पाया गया कि न केवल वयस्क बल्कि नाबालिग भी गुटखा और पान मसाले का सेवन कर रहे थे. इससे पहले, पश्चिम बंगाल सरकार ने मई 2013 में एक साल के लिए इसी तरह का प्रतिबंध लगाया था.
इससे पूर्व, बंगाल के पड़ोसी राज्य बिहार ने भी इस साल अगस्त में गुटखा और पान मसाला की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था. नीतीश कुमार सरकार ने सत्ता में आने पर बिहार में पूर्ण शराबबंदी भी लागू की थी.
मुख्य बातें
• पश्चिम बंगाल सरकार के आदेश के अनुसार, राज्य में गुटखा और पान मसाले के उत्पादन, भंडारण, वितरण, परिवहन, प्रदर्शन और बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.
• राज्य सरकार का मानना है कि गुटखा और तम्बाकू के सेवन से बड़ी संख्या में लोग कैंसर और इसी तरह की बीमारियों से पीड़ित हैं. यह कार्रवाई ऐसे उत्पादों के प्रतिकूल प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद करेगी.
• जब राजस्थान सरकार ने तंबाकू मिश्रित गुटखा और ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाया, तो पान मसाला कंपनियों ने उस प्रतिबंध के बाद तंबाकू और पान मसाला दोनों अलग-अलग बेचना शुरू कर दिया.
तंबाकू और कैंसर
एक अनुमान के अनुसार, विश्व भर में गुटखा और खैनी जैसे तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले 65% लोग भारत में रहते हैं और इसमें से 90% मुंह के कैंसर के मामले गुटखा अथवा तम्बाकू का सेवन करने से होते हैं. एक अनुमान के अनुसार, भारत में तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वालों में 48 प्रतिशत पुरुष और 20% महिलाएं शामिल हैं. वैज्ञानिक शोधकर्ताओं द्वारा यह साबित किया जा चुका है कि तंबाकू सेवन से शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे मुंह, गला, मस्तिष्क, किडनी आदि भी कैंसर की चपेट में आ सकते हैं.